हकलाने के बारे में 7 सामान्य भ्रम — सच्चाई क्या है
हकलाना एक भाषण विकार है जिसमें ध्वनियों, अक्षरों या शब्दों का दोहराव, और बोलने में रुकावटें शामिल होती हैं। इस स्थिति के बारे में कई गलत धारणाएं आज भी समाज में मौजूद हैं।
भ्रम 1: लोग घबराहट के कारण हकलाते हैं। सच्चाई: घबराहट हकलाने का कारण नहीं बनती है, हालांकि हकलाने के कारण व्यक्ति सामाजिक परिस्थितियों में चिंतित महसूस कर सकता है। यह एक न्यूरोलॉजिकल स्थिति है।
भ्रम 2: माता-पिता की गलती के कारण बच्चा हकलाता है। सच्चाई: इसका लालन-पालन से कोई संबंध नहीं है। इसका एक मजबूत आनुवंशिक (जेनेटिक) संबंध होता है।
भ्रम 3: बच्चे हमेशा अपने आप हकलाने से ठीक हो जाते हैं। सच्चाई: हालांकि कुछ बच्चे समय के साथ ठीक हो जाते हैं, लेकिन यदि समस्या 6-12 महीनों से अधिक बनी रहती है, तो पेशेवर स्पीच थेरेपी की आवश्यकता होती है।
भ्रम 4: हकलाने वाले लोग कम बुद्धिमान होते हैं। सच्चाई: हकलाने और बुद्धिमत्ता के बीच कोई संबंध नहीं है। ऋतिक रोशन और एमिली ब्लंट जैसे कई प्रसिद्ध लोग हकलाने का सफलतापूर्वक सामना कर चुके हैं।
स्पीच थेरेपी बच्चों और वयस्कों में बोलने के आत्मविश्वास को बढ़ाने में मदद करती है। हमारे क्लिनिक में हम विशेषज्ञों द्वारा अनुकूलित थेरेपी प्रदान करते हैं।